आखिर कौन है वो?
क्यों किसी ऐसे के लिए रो रहा हूँ
जिसे मैं जानता नही
सिर्फ उसे खो रहा हूँ
ये कोई मानता नही।
सब कहते है ये सब फालतू है
अभी तेरा दिमाग कच्चा है
लेकिन दोस्त , ऐसे कैसे महलु
क्योंकि दिल तो मेरा सच्चा है।
रात भर सोचता हूं
की काश उससे मिल पाता
अपने मन मे उसे खोजता हूँ
लेकिन हर बार विफ़ल हो जाता।
क्या वो कभी मुझसे मिलेगा?
या फिर वो कभी नही आएगा,
क्या मेरे मन का फूल कभी खिलेगा?
या फिर ये फूल खिलने से पहले ही मुरझा जएगा।
क्या मेरा इंतेज़ार कभी खत्म होगा?
या फिर मेरा दिल यूं ही टूट जाएगा,
क्या ये सब सिर्फ एक स्वप्न होगा?
और ये स्वप्न चूर चूर हो जाएगा...।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें